महारानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय की 62 एमएससी छात्राओं ने जानी कचरा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकें, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार की संभावनाएं
भोपाल। वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, जलवायु संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में भोपाल मॉडल एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभर रहा है। इसी विषय पर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वेस्ट मैनेजमेंट (IIWM) द्वारा टेक्निकल टीचर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित पांच दिवसीय इंटर्नशिप कार्यक्रम के समापन अवसर पर विशेष तकनीकी एवं जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इसमें महारानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय की एमएससी की 62 छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम में पर्यावरणविद् एवं कचरा प्रबंधन विशेषज्ञ इम्तियाज अली ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि कचरा प्रबंधन अब केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक विकास से है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वैज्ञानिक और आधुनिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना जरूरी है।
भोपाल मॉडल में संसाधन प्रबंधन पर जोर
इम्तियाज अली ने बताया कि भोपाल में कचरा प्रबंधन को केवल कचरा उठाने और निपटाने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्धन से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कचरे का स्रोत पर पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) में छंटाई, पुनर्चक्रण और अवशेषों के वैज्ञानिक निष्पादन की प्रक्रिया समझाई। साथ ही सार्थक संस्था के माध्यम से कचरा बीनने वाले समुदाय के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण और सम्मानजनक आजीविका के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
जलवायु परिवर्तन रोकने में कचरा प्रबंधन की भूमिका
उन्होंने बताया कि खुले में कचरा जलाने, जैविक कचरे को बिना उपचार लैंडफिल में डालने और प्लास्टिक के अनुचित निपटान से वायु, जल और मिट्टी प्रदूषित होते हैं। जैविक कचरे से निकलने वाली मीथेन गैस भी जलवायु परिवर्तन को बढ़ाती है।
जैविक कचरे से खाद और बायोगैस निर्माण, प्लास्टिक का पुनर्चक्रण तथा संसाधनों के पुनः उपयोग से पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है।
ई-वेस्ट प्रबंधन की दी जानकारी
सत्र में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के बढ़ते खतरे पर भी चर्चा हुई। छात्राओं को बताया गया कि मोबाइल, कंप्यूटर, बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कई मूल्यवान धातुएं होती हैं। इनके अनुचित निपटान से मिट्टी और जल प्रदूषण के साथ मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए ई-वेस्ट को अधिकृत संग्रह केंद्रों और रिसाइक्लर्स तक पहुंचाना आवश्यक है।
मानव बालों से जैविक खाद बनाने की संभावनाएं
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सैलून और ब्यूटी पार्लर से निकलने वाले मानव बालों से जैविक उर्वरक तैयार करने की संभावनाओं पर चर्चा रही। इम्तियाज अली ने बताया कि मानव बालों में केराटिन और नाइट्रोजन जैसे तत्व पाए जाते हैं। उचित वैज्ञानिक प्रसंस्करण और परीक्षण के बाद इनका उपयोग कृषि संबंधी उत्पादों के विकास में किया जा सकता है।
कचरे से रोजगार और नए उद्यमों के अवसर
उन्होंने प्लास्टिक, कागज, धातु और कपड़े जैसे पुनर्चक्रण योग्य कचरे से उपयोगी उत्पाद बनाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में युवाओं, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए हरित रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
छात्राओं ने पूछे सवाल
कार्यक्रम में छात्राओं ने प्लास्टिक रिसाइक्लिंग, ई-वेस्ट, जैविक खाद निर्माण, जलवायु परिवर्तन और कचरे से उपयोगी उत्पाद बनाने से जुड़े सवाल पूछे। इम्तियाज अली ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने छात्राओं से घरों और शैक्षणिक संस्थानों में कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
गणमान्य अतिथियों की रही मौजूदगी
इस अवसर पर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एन.पी. शुक्ला, श्री एम. पटेल तथा विज्ञान भारती के श्री विजय सकलेचा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
पांच दिवसीय इंटर्नशिप का समापन सत्र छात्राओं के लिए कचरा प्रबंधन के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ उसके व्यावहारिक और तकनीकी पहलुओं को समझने का महत्वपूर्ण अवसर बना।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा—कचरा समस्या नहीं, बल्कि एक संसाधन है। वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से इसे रोजगार, उपयोगी उत्पादों और पर्यावरण संरक्षण के अवसर में बदला जा सकता है। यही स्वच्छ भारत से विकसित भारत 2047 की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
SD NEWS – सच्चे दिन | भोपाल
