दिवाली से पहले भुगतान की मांग को लेकर ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में हजारों फोन कॉल करने का अभियान चलाया। ठेकेदारों का आरोप है कि लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण आर्थिक संकट बढ़ गया है और कई लोगों को अपनी संपत्ति तक बेचने की नौबत आ गई है।
किन विभागों का कितना भुगतान बकाया?
महाराष्ट्र राज्य ठेकेदार महासंघ (MSCA) के अनुसार, लगभग डेढ़ साल से विभिन्न सरकारी विभागों में भुगतान लंबित है।
| सरकारी विभाग | कथित बकाया राशि |
|---|---|
| लोक निर्माण विभाग (PWD) | ₹27,000 करोड़ |
| जल जीवन मिशन | ₹38,000 करोड़ |
| आदिवासी विकास विभाग | ₹12,000 करोड़ |
| ग्रामीण विकास विभाग | ₹3,500 करोड़ |
| पर्यटन विभाग | ₹2,509 करोड़ |
| कुल | ₹83,009 करोड़ |
अन्य विभागों की बकाया राशि मिलाकर महासंघ ने कुल लगभग ₹86,000 करोड़ का दावा किया है। Mumbai news+1
मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची ठेकेदारों की आवाज
31 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा सुनेत्रा पवार के कार्यालयों में फोन करना शुरू किया। अभियान के दौरान कई ठेकेदारों की शिकायत रही कि फोन का जवाब नहीं मिला या उन्हें संबंधित विभाग से संपर्क करने को कहा गया।
ठेकेदारों ने दावा किया है कि भुगतान में देरी के कारण बैंक कर्ज, कर्मचारियों की मजदूरी और कारोबार चलाने में गंभीर मुश्किलें आ रही हैं। कुछ ठेकेदारों ने घर और संपत्ति नीलाम होने की बात भी कही है।
सरकार के सामने बड़े सवाल
- सरकारी काम पूरा होने के बाद भुगतान में देरी क्यों?
- छोटे ठेकेदारों को आर्थिक संकट से राहत कब मिलेगी?
- ₹86 हजार करोड़ की कथित बकाया राशि का भुगतान कब तक होगा?
- भुगतान व्यवस्था की जवाबदेही किसकी होगी?
SD NEWS की टिप्पणी: सरकारी विकास कार्यों में ठेकेदारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि काम पूरा होने के बाद लंबे समय तक भुगतान नहीं होता, तो इसका असर केवल ठेकेदारों पर नहीं बल्कि मजदूरों, आपूर्तिकर्ताओं और विकास कार्यों पर भी पड़ता है। सरकार को बकाया भुगतान की स्थिति सार्वजनिक कर समयबद्ध समाधान बताना चाहिए।
