डबरा: जामिया अतिया लिलबनात में भव्य धार्मिक सम्मेलन, 82 छात्रों की हुई दस्तर बंदी

डबरा: जामिया अतिया लिलबनात में भव्य धार्मिक सम्मेलन, 82 छात्रों की हुई दस्तर बंदी

खत्म-ए-बुखारी शरीफ एवं दस्तरबंदी समारोह में देश की प्रमुख धार्मिक हस्तियों ने की शिरकत, छात्राओं को प्रमाण-पत्र और पुरस्कार देकर किया सम्मानित

डबरा (मध्य प्रदेश)। डबरा के मलघन स्थित जामिया अतिया लिलबनात, मदरसा अरबिया सिराजुल उलूम की शाखा में भव्य आम सम्मेलन (इस्लाह-ए-मुआशरा), खत्म-ए-बुखारी शरीफ एवं दस्तरबंदी समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 82 छात्रों की दस्तरबंदी की गई, जबकि छात्राओं को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अमीर-ए-शरीयत मुफ्ती-ए-आजम हजरत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान, अध्यक्ष जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश एवं अध्यक्ष राब्ता मदारिस इस्लामिया मध्य प्रदेश ने की। वहीं देश की प्रमुख धार्मिक हस्ती हजरत मौलाना सैयद अशहद रशीदी, अध्यक्ष जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश एवं प्रबंधक जामिया कासमिया शाही, मुरादाबाद, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

मुख्य अतिथि मौलाना सैयद अशहद रशीदी ने खत्म-ए-बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ कराया। अपने संबोधन में उन्होंने मदरसों के जिम्मेदारों को संस्थानों के भूमि संबंधी दस्तावेज, साफ-सफाई, छात्रावास की व्यवस्थाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज और व्यवस्थाएं दुरुस्त रखी जाएं तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।

मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान ने अपने संबोधन में जमीयत उलेमा हिंद की ऐतिहासिक सेवाओं, कुर्बानियों और सामाजिक एवं धार्मिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज सुधार की आवश्यकता बताते हुए लोगों से सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस्लामी मदरसे नई पीढ़ी के धार्मिक ज्ञान, संस्कार और चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों को प्रारंभ से ही दीन की शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा भी दिलाई जानी चाहिए, ताकि वे जीवन की दोनों जिम्मेदारियां बेहतर ढंग से निभा सकें।

मौलाना मुफ्ती जियाउल्लाह कासमी, उपाध्यक्ष जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश एवं शेखुल हदीस, जामिया इस्लामिया अरबिया, भोपाल ने भी समाज सुधार विषय पर प्रभावशाली विचार रखे और मदरसों की शैक्षणिक एवं धार्मिक सेवाओं पर प्रकाश डाला।

मौलाना फरीद साहब नदवी, शिक्षक हदीस, जामिया अरबिया हथौड़ा बांदा ने मदरसों और दीनी मकतबों की उपयोगिता बताते हुए कहा कि ये संस्थान नई पीढ़ी को कुरान और सुन्नत की शिक्षा तथा नैतिक संस्कार प्रदान करने के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उन्होंने समाज के लोगों से मदरसों के संरक्षण और विकास में सहयोग करने की अपील की।

कार्यक्रम का संचालन मौलाना मुफ्ती उसामा अहमद ने किया। अंत में मदरसा अरबिया सिराजुल उलूम डबरा के नाजिम हाफिज रियाज अहमद ने सभी अतिथियों, उलेमाओं, इमामों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मदरसे की शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों की जानकारी भी दी।

इस अवसर पर मोहिउद्दीन उर्फ बब्बू भाई देवास, सदस्य कार्यकारिणी जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश, मुफ्ती मोहम्मद एजाज, मौलाना अब्दुल हसीब ग्वालियर, मौलाना तैयब, अध्यक्ष जमीयत उलेमा जिला ग्वालियर, हाफिज अब्दुल कय्यूम, जनरल सेक्रेटरी जमीयत उलेमा जिला ग्वालियर, काजी हशमत, काजी शहर एवं अध्यक्ष जमीयत उलेमा जिला भिंड, कारी फरीद अहमद, अध्यक्ष जमीयत उलेमा जिला दतिया सहित अनेक उलेमा, इमाम, मदरसा प्रबंधक एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही।