ट्रेन में कन्फर्म टिकट की कमी के बीच निजी बस ऑपरेटरों के बढ़े किराये से यात्री परेशान, परिवारों का बजट बिगड़ा
इंदौर/भोपाल। दिवाली और छठ पर्व पर अपने घर पहुंचने की तैयारी कर रहे यात्रियों के सामने इस बार सफर बड़ी आर्थिक चुनौती बनता जा रहा है। ट्रेनों में कन्फर्म टिकट की कमी और त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग का असर निजी बसों के किराये पर दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर से संचालित कई रूटों पर बस टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इंदौर से ग्वालियर जाने वाली निजी बसों का किराया 3,500 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य दिनों में यही किराया लगभग 700 से 1,000 रुपये के बीच रहता है। जयपुर और जबलपुर जैसे रूटों पर भी टिकट महंगे हुए हैं। कुछ रूटों पर सामान्य किराये की तुलना में करीब 250 प्रतिशत तक वृद्धि बताई गई है।
त्योहार में मजबूरी का फायदा तो नहीं?
यात्रियों का कहना है कि त्योहार परिवार के साथ मनाने की इच्छा हर किसी की होती है, लेकिन जब यात्रा का खर्च अचानक कई गुना बढ़ जाता है तो आम आदमी के लिए घर पहुंचना मुश्किल हो जाता है। खासकर नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और छोटे परिवारों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार और परिवहन विभाग से सवाल
इस स्थिति में परिवहन विभाग की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों को राहत देने के लिए अतिरिक्त बसों की व्यवस्था, किराये की पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के पालन की निगरानी जरूरी है। प्रशासन को यह भी देखना चाहिए कि त्योहारों की भीड़ के दौरान यात्रियों से मनमाना किराया तो नहीं वसूला जा रहा।
SD NEWS का सवाल: त्योहारों पर घर लौटना क्या आम आदमी के लिए महंगा सौदा बनता जा रहा है? क्या परिवहन विभाग निजी बसों के किराये पर प्रभावी निगरानी करेगा? यात्रियों को राहत कब मिलेगी?
